लड़कियां भाव खा रही हैं.. लडके धोखा खा रहे हैं..

लड़कियां भाव खा रही हैं..
लडके धोखा खा रहे हैं..
पुलिस रिश्वत खा रही है़..
नेता माल खा रहे हैं..
किसान जहर खा रहे हैं..
जवान गोली खा रहे हैं..
कौन कहता है कि भारत भूखा मर रहा है…              
झाडू वाला मुख्यमंत्री !
चाय वाला प्रधानमंत्री ।
12 वी पास देश के मंत्री ।
8 वी पास सरपंच ।
और हम ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट
वॉट्स एप पर ग्रुप- ग्रुप खेल रहे हैं।

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रंग से गोरी न थी लेकिन सुन्दर थी

रंग से गोरी न थी

लेकिन सुन्दर थी

बहोत ऊँची न थी

लेकिन मेरे लिए योग्य थी

प्रेम देने वाली न सही

मेरे कदमो से कदम मिलाती थी

मंदिर आने से इनकार करती थी

लेकिन बाहर मेरा इंतजार करती थी

कही भी जाओ मेरे लिए रुक जाती थी

वो
.
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.
.
.
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.

मेरी चप्पल थी

कोई साला चुराके ले गया    

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उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है।

उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है।
वक़्त की आंधी में हालात बदल जाते है।
सोचता हूं काम कर-कर के रिकॉर्ड तोड़ दूं।
कमबख्त सैलेरी देख के ख्यालात बदल जाते हैं

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Latest joke

पति दूध पीकर : छीः ये कैसा दूध है ?

बीवी : वो केसर ख़त्म हो गया था जी 
तो मैंने आपकी जेब से 
‘बिमल पान मसाला’ डाल दिया क्योंकि
इसके दाने -दाने मे है केसर का दम.                     

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सभी पराये हो जाते हैं, होती नहीं पराई मम्मी ।

लेती नहीं दवाई मम्मी ,
जोड़े पाई-पाई मम्मी ।

दुःख थे पर्वत, राई मम्मी,
हारी नहीं लड़ाई मम्मी ।

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई मम्मी ।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई मम्मी ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई मम्मी ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई मम्मी ।

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई मम्मी ।

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई मम्मी ।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, मम्मी ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई मम्मी ।

मम्मी से थोड़ी – थोड़ी,
सबने रोज़ चुराई मम्मी ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई मम्मी ।

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई मम्मी ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई मम्मी ।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई मम्मी ।

बेटी की ससुराल रहे खुश,
सब ज़ेवर दे आई मम्मी ।

मम्मी से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई मम्मी ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई मम्मी ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई मम्मी ।

घर के शगुन सभी मम्मी से,
है घर की शहनाई मम्मी ।

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई मम्मी ।

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घर में जब खुद के शादी की चर्चा होती है तो लगता है जैसे इलेक्शन का टिकट मिल गया हो,

घर में जब खुद के शादी की चर्चा होती है तो लगता है जैसे इलेक्शन का टिकट मिल गया हो,

लड़की देखते है तो लगता है कि प्रचार की धमाधम चल रही हो,

किसी लड़की के हाँ कहने पर लगता है की जैसे MLA बन गए हो,

और शादी के वो 2-4 दिन लगता है जैसे हम मुख्यमंत्री बन गए हो,

और

शादी के 1 साल बाद लगता है जैसे कोई “घोटाला” कर लिया हो!!

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बचपन में माँ कहती है , तुझे कुछ समझ नहीं आता।

बचपन  में  माँ  कहती  है ,
तुझे  कुछ  समझ  नहीं  आता।
जवानी  में  बीवी  कहती  है ,
आपको  कुछ  समझ  नहीं  आता।
बुढ़ापे  में  बच्चे  कहते  है ,
आपको  कुछ  समझ  नहीं  आता ।
पुरुषों  की  समझने  की  उम्र  कौनसी ,
ये  समज  नहीं  आता।

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एक सरदार, एक बनिए के यहां शादी में गया।

एक सरदार, एक बनिए के यहां शादी में गया।

शादी के  पंडाल मे अंदर जाने के 2 दरवाजे थे।
एक दरवाजे पे रिश्तेदार, दुसरे पे दोस्त लिखा था।

सरदार,बहुत फक्र से  दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गया।
आगे फिर 2 दरवाजे थे, एक पे महिला, दुसरे पे पुरुष लिखा था।

सरदार पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गया।
वहां 2 और दरवाजे थे, एक पे गिफ्ट (gift) देने वाला, दुसरे पे बिना गिफ्ट (without-gift) वाले लिखा था।

सरदार बिना-गिफ्ट (without-gift) वाले दरवाजे से अंदर गया।

जब देखा तो सरदार बाहर गली में खड़ा था।

और लिखा था… शर्म तो आ नहीं रही होगी, बनिए की शादी और मुफ्त (free) में रोटी खाएगा???
जा-जा हवा खा..:’

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इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई मम्मी

लेती नहीं दवाई मम्मी ,
जोड़े पाई-पाई मम्मी ।

दुःख थे पर्वत, राई मम्मी,
हारी नहीं लड़ाई मम्मी ।

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई मम्मी ।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई मम्मी ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई मम्मी ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई मम्मी ।

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई मम्मी ।

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई मम्मी ।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, मम्मी ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई मम्मी ।

मम्मी से थोड़ी – थोड़ी,
सबने रोज़ चुराई मम्मी ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई मम्मी ।

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई मम्मी ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई मम्मी ।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई मम्मी ।

बेटी की ससुराल रहे खुश,
सब ज़ेवर दे आई मम्मी ।

मम्मी से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई मम्मी ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई मम्मी ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई मम्मी ।

घर के शगुन सभी मम्मी से,
है घर की शहनाई मम्मी ।

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई मम्मी .

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एक पापी आदमी मरने के बाद नर्क में गया ।

एक पापी आदमी मरने के बाद नर्क में गया ।

कुछ सालों बाद उसके गाँव के ही पंडितजी उसे  नर्क में मिल गये ।

उस पापी आदमी को बड़ा आश्चर्य हुआ कि सारा गाँव जिन पंडितजी की शराफत, इंसानियत की कसमें खाता था,
उन्हे तो स्वर्ग में जाना चाहिये था ।
उसने हैरान होकर पंडितजी से पूछ ही लिया-
” पंडितजी !!आप यहाँ कैसे ???

पंडितजी बोले -“पंडिताईन के कारण

” पापी- ” मतलब ?? ”

पंडितजी- ” मैंने मेरी पूरी जिंदगी में कभी झूठ नही बोला, बस बीवीसे बोलता था..

.” पापी- ” मै कुछ समझा नही….

” पंडितजी- ” वो रोज सुबह तैयार होकर मुझसे पूछती-

मै कैसी लग रही हूँ जी ??? ”
.
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ज्यादा हँसो मत…..तुम सब भी नर्क मे ही जानेवाले हो …

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